Nation Today 24×7 – Nation Today 24×7 https://nationtoday24x7.com Nation Today 24x7 News Portal Sun, 07 Jun 2026 18:33:56 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 डॉक्टर साथी ऐप” : मरीजों और डॉक्टरों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति का सपना अधूरा रह गया https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%a1%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%90%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0/ Sun, 07 Jun 2026 18:33:53 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1902 प्रदीप कुमार गांगले


खरगोन। आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने की सोच के साथ तैयार किया गया “डॉक्टर साथी ऐप” आज भी एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे यदि प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाती तो हजारों मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता था।
इस महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल की परिकल्पना प्रदीप कुमार गांगले द्वारा शासकीय अस्पताल खरगोन सहित दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की समस्याओं को ध्यान में रखकर की गई थी। ऐप का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में लगने वाली लंबी कतारों, अव्यवस्थित व्यवस्थाओं तथा समय की बर्बादी को समाप्त करना था।
“डॉक्टर साथी ऐप” के माध्यम से मरीज अपने मोबाइल फोन से ही ऑनलाइन पंजीयन एवं रोगी कल्याण समिति की फीस जमा कर सकते थे तथा डॉक्टर से मिलने का समय (अपॉइंटमेंट) प्राप्त कर सकते थे। इससे अस्पतालों में भीड़ कम होती और मरीजों को घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता।
ऐप की एक विशेषता यह भी थी कि मरीजों को उनकी दवाइयों एवं उपचार संबंधी समय-समय पर मोबाइल पर सूचना और अलर्ट प्राप्त होते। वहीं उनकी स्वास्थ्य संबंधी फाइलें और रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में सुरक्षित रहते, जिससे भविष्य में उपचार प्रक्रिया अधिक सुगम और प्रभावी बन सकती थी।
कोविड जैसे संक्रमणकाल के कठिन अनुभवों को देखते हुए इस ऐप की परिकल्पना की गई थी, ताकि भविष्य में किसी भी महामारी या आपदा की स्थिति में मरीजों को अस्पतालों की भीड़ से बचाते हुए घर बैठे स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सके।
इतना ही नहीं, डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मी भी अपनी अवकाश संबंधी आवेदन प्रक्रिया को इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित कर सकते थे। डॉक्टर की अनुपस्थिति की जानकारी भी ऐप पर प्रदर्शित होती, जिससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
हालांकि इस अभिनव और जनहितैषी परियोजना को साकार करने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सहमति और समर्थन नहीं मिल सका। परिणामस्वरूप यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
यदि “डॉक्टर साथी ऐप” को स्वीकृति मिलती, तो यह न केवल खरगोन जिले बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक मॉडल डिजिटल व्यवस्था बन सकता था। आज भी यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि नवाचार और जनहित की सोच को उचित अवसर एवं समर्थन मिले तो स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव संभव है।

]]>
किसानों की समस्याओं को लेकर रुणगांव में आज विशाल किसान महासभा, किसानों से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%87/ Sun, 07 Jun 2026 06:06:02 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1900 प्रदीप कुमार गांगले

किसानों की समस्याओं को लेकर रुणगांव में आज विशाल किसान महासभा, किसानों से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान
खरगोन। किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा विकासखंड खरगोन के ग्राम रुणगांव में रविवार 7 जून 2026 को विशाल किसान महासभा एवं आमसभा का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम शाम 7 बजे से 10 बजे तक आयोजित होगा, जिसमें क्षेत्र के किसानों, मजदूरों, युवाओं एवं आमजन को आमंत्रित किया गया है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि किसानों के सामने वर्तमान में बढ़ती महंगाई, कृषि लागत में वृद्धि, भूमि अधिग्रहण, खाद वितरण व्यवस्था में अनियमितताएं, नकली खाद-कीटनाशकों की समस्या तथा कृषि उपज के उचित मूल्य जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर किसानों को संगठित कर उनकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह महासभा आयोजित की जा रही है।
संगठन का कहना है कि देशगांव-जुलवानिया राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण एवं अन्य विकास परियोजनाओं से प्रभावित किसानों को उनकी जमीन, खेत, मकान और खलिहानों का उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। वहीं हाईटेंशन लाइन परियोजनाओं से प्रभावित किसानों को भी पर्याप्त राहत नहीं मिल पा रही है। महासंघ का आरोप है कि खाद वितरण व्यवस्था में व्याप्त खामियों और नकली खाद-कीटनाशकों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
महासभा में किसानों की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रभावित किसानों को बाजार मूल्य अथवा भूमि अधिग्रहण का चार गुना मुआवजा देने, प्रत्येक किसान परिवार को शासकीय नौकरी प्रदान करने, हाईटेंशन लाइन से प्रभावित किसानों को न्यायोचित मुआवजा देने, खाद वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने, प्रत्येक जिले में नकली खाद एवं कीटनाशकों की जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित करने तथा किसानों को ऋणमुक्त करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही समर्थन मूल्य से कम कीमत पर कृषि उपज की खरीदी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई जाएगी।
महासभा को संबोधित करने के लिए प्रदेश संगठन मंत्री एवं मुख्य वक्ता गोपाल पाटीदार, मालवा-निमाड़ प्रांताध्यक्ष रामेश्वर गुर्जर, निमाड़ प्रांत अध्यक्ष जगदीश यादव, जिला अध्यक्ष किशोर पाटीदार तथा विकासखंड खरगोन अध्यक्ष सुखदेव पाटीदार उपस्थित रहेंगे।
आयोजकों ने क्षेत्र के किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी समस्याओं और अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाएं। महासंघ का कहना है कि किसानों की एकजुटता ही उनकी समस्याओं के समाधान का सबसे बड़ा माध्यम है।

]]>
खून से लिखी पुकार: संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का सब्र टूटा, मुख्यमंत्री को रक्त से भेजे पोस्टकार्ड980 स्वास्थ्य कर्मियों ने खून से लिखी व्यथा, चौथे दिन भी जारी रही अनिश्चितकालीन हड़ताल https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%96%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%b8/ Sat, 06 Jun 2026 08:58:12 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1897 प्रदीप कुमार गांगले


खरगोन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत जिले के 980 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल के चौथे दिन एक अनोखे और भावनात्मक विरोध प्रदर्शन के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपने रक्त से लिखे पोस्टकार्ड भेजकर वर्षों की उपेक्षा और पीड़ा को व्यक्त किया।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला अध्यक्ष ने बताया कि यह किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि मजबूरी, संघर्ष और दर्द की वह आवाज़ है जिसे सरकार तक पहुंचाने के लिए कर्मचारियों ने अपने खून का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर आज तक संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात जनता की सेवा की, लेकिन इसके बावजूद आज भी वे असुरक्षित भविष्य, अल्प वेतन, ग्रेड-पे विसंगति तथा नियमितीकरण जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर कार्य करने वाले संविदा कर्मियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। मजबूर होकर अब उन्होंने अपने रक्त से मुख्यमंत्री के नाम संदेश लिखकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।
संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार से टकराव नहीं, बल्कि समस्याओं का सम्मानजनक समाधान प्राप्त करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनके समर्पण, सेवा और परिवारों की चिंता को समझते हुए मांगों पर सकारात्मक एवं संवेदनशील निर्णय लेगी।
हड़ताली कर्मचारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए रक्त लिखित पोस्टकार्ड केवल कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि उन हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की उम्मीद, पीड़ा और संघर्ष का प्रतीक हैं जिन्होंने वर्षों तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दिया है।
“खून से लिखी चिट्ठी, फिर भी नहीं पिघला सिस्टम”
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का सवाल – आखिर कब सुनेगी सरकार उन हाथों की पुकार, जिन्होंने संकट के समय प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाला था?

]]>
स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगा ब्रेक! 980 संविदा कर्मियों की हड़ताल से खरगोन जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%97/ Wed, 03 Jun 2026 12:38:06 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1893
जिला अस्पताल से लेकर गांवों के स्वास्थ्य केंद्र तक कामकाज ठप, मरीज और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

प्रदीप कुमार गांगले
खरगोन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत जिले के लगभग 980 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई है। प्रदेशभर के 32 हजार संविदा कर्मचारियों द्वारा एक साथ काम बंद करने का असर अब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में साफ दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्रों तक अनेक जरूरी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।
संविदा स्वास्थ्य संगठन की जिलाध्यक्ष ममता हिरवे ने आरोप लगाया कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर काम कर रहे कर्मचारियों के साथ लगातार वादाखिलाफी की जा रही है। 2018 की वेतन नीति हो, 2023 की संविदा नीति हो या फिर मुख्यमंत्री द्वारा जनवरी 2026 में की गई घोषणाएं—आज तक अधिकांश फैसले कागजों से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी, प्रसूताओं पर संकट
जिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में 10 में से 8 संविदा नर्सिंग ऑफिसर हड़ताल पर हैं। ऐसे में प्रसूता महिलाओं की देखरेख का जिम्मा गिने-चुने कर्मचारियों पर आ गया है। कई वार्डों में कर्मचारियों से अतिरिक्त ड्यूटी कराई जा रही है, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है।
टीबी, टीकाकरण, लेबर रूम और जांच सेवाएं प्रभावित
हड़ताल के कारण मेडिकल वार्ड, टीबी यूनिट, एसएनसीयू, एनसीडी क्लिनिक, परिवार कल्याण केंद्र, औषधि वितरण केंद्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा, सीएम हेल्पलाइन, एमएलसी सेवाएं, एनआरसी, एएनसी एवं पीएनसी वार्डों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
गांवों तक पहुंचा असर, ऑनलाइन सिस्टम भी ठप
ब्लॉक स्तर पर अनमोल पोर्टल, यू-विन पोर्टल, टीकाकरण सत्र निर्माण, सिकल सेल जांच, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, लाभार्थी भुगतान, जन्म-मृत्यु पंजीयन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग का कार्य लगभग ठप पड़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के नियमित टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
सरकार की घोषणाएं बनीं कागजी वादे?
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि 15 से 20 वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न तो नियमितीकरण का लाभ मिला और न ही घोषित सुविधाएं। कर्मचारियों का आरोप है कि हर आंदोलन के बाद आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन क्रियान्वयन नहीं होता।
चेतावनी: मांगें पूरी नहीं हुईं तो और गहराएगा संकट
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो जिले की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर लाखों मरीजों, गर्भवती महिलाओं और ग्रामीण जनता पर पड़ेगा।
बड़ा सवाल
क्या स्वास्थ्य व्यवस्था का आधार बने संविदा कर्मचारियों की अनदेखी सरकार को भारी पड़ेगी?

]]>
मूर्ति कांड के बाद अब जिम कांड! नगर पालिका में किसके इशारे पर चल रहा खेल? https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%95/ Tue, 02 Jun 2026 12:09:33 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1890

खरगोन। नगर पालिका परिषद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लाखों रुपये के जिम उपकरणों की खरीदी को लेकर उठे विवाद ने परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस खरीदी को लेकर पूरे शहर में चर्चा है, उसी मामले में अध्यक्ष महोदया द्वारा लगातार अलग-अलग जानकारियां दिए जाने से संदेह और गहरा गया है।शहर में चर्चा है कि पूरे प्रकरण में कमीशनखोरी का खेल हुआ है और अब संबंधित लोगों को बचाने की कवायद चल रही है। विशेष रूप से इंदौर के दीपक नामक व्यक्ति की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उसका नाम और भूमिका सार्वजनिक करने से परहेज क्यों किया जा रहा है?सूत्रों के अनुसार जिम का सामान फिलहाल सुरक्षित रख दिया गया है और पूरे मामले को नए टेंडर की दिशा में ले जाने की तैयारी है। यदि ऐसा है तो सवाल यह है कि बिना पूरी तैयारी और पारदर्शिता के लाखों रुपये की प्रक्रिया आखिर शुरू ही क्यों की गई?मूर्ति कांड के बाद अब जिम प्रकरण में भी अध्यक्ष महोदया के परिवार की भूमिका को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्ष के साथ-साथ परिषद के भीतर भी असंतोष की आवाजें सुनाई देने लगी हैं। जो पार्षद कल तक खुलकर समर्थन में खड़े थे, उनके बदलते सुर अब राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गए हैं।नगरवासियों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो फिर तथ्यों को सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट क्यों है? और यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?जनता के सवालजिम खरीदी का वास्तविक लाभ किसे मिलने वाला था?इंदौर के दीपक नामक व्यक्ति की भूमिका क्या है?जिम उपकरणों को सुरक्षित रखकर दोबारा टेंडर की तैयारी क्यों?क्या परिषद में निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधि ले रहे हैं या पर्दे के पीछे कोई और खेल संचालित कर रहा है?नगर में अब एक ही चर्चा है— विकास के नाम पर खर्च हुए लाखों रुपये का हिसाब कौन देगा और सच सामने कब आएगा?

मुझे कोई जानकारी नहीं लोग झूठी कहानियां बोल रहे मुझे बदनाम करने के लिए ।

छाया जोशी नगर पालिका परिषद खरगोन

]]>
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती श्रद्धा, सेवा और संस्कारों के साथ मनाई गई https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%95/ Sun, 31 May 2026 05:13:09 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1886 प्रदीप कुमार गांगले


खरगोन। लोकमाता, धर्मरक्षक एवं आदर्श शासक अहिल्याबाई होल्कर की जयंती श्रद्धा, भक्ति और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों ने मातोश्री अहिल्याबाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए हुए धर्म, सेवा, न्याय और जनकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रकाश चित्ते ने मातोश्री अहिल्याबाई के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का संपूर्ण जीवन धर्म, सेवा, परोपकार और मानव कल्याण को समर्पित रहा। उनके आदर्श आज भी समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम के आयोजक प्रदीप कुमार गांगले ने बताया कि प्रतिवर्ष लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई जाती है, जिसमें खेल जगत से जुड़े बच्चे, युवा एवं वरिष्ठजन बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि मातोश्री के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में संस्कार, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया जा रहा है।
कार्यक्रम में खेल प्रशिक्षक अनिल पांडे ने भी मातो श्री अहिल्या को पुष्प अर्पित किए ,वही कोच पवन शरद, कोच जितेंद्र हिरवे ,आनंद बड़ोले, रवि गांगले, दीपक सावले, अशोक गाठे, दुर्गेश चौधरी, मोहित गांगले सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान “लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर अमर रहें” एवं “जय देवी अहिल्या” के जयघोष गूंजते रहे। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुए इस आयोजन ने सभी उपस्थितजनों को मातोश्री के आदर्शों पर चलकर समाज सेवा एवं जनकल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा प्रदान की।

]]>
नर्मदा को छलनी कर रहा अवैध खनन का खेल, प्रशासन की आंखों के सामने लूटी जा रही प्राकृतिक संपदा https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a7/ Fri, 29 May 2026 04:01:01 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1881 प्रदीप कुमार गांगले


बड़वाह। नर्मदा घाटों पर विकास कार्यों की आड़ में अवैध खनन का काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे घाट निर्माण कार्य के नाम पर ठेकेदार खुलेआम नर्मदा किनारे मशीनें उतारकर बोल्डर और पत्थरों की खुदाई कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग या तो आंख मूंदे बैठा है या फिर सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए है।
मामला तब उजागर हुआ जब खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो डंपरों को जब्त किया। बताया जा रहा है कि नर्मदा किनारे बिना वैध अनुमति और बिना रॉयल्टी जमा किए अवैध तरीके से बोल्डर निकाले जा रहे थे। सवाल यह उठता है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस खेल की भनक प्रशासन को पहले क्यों नहीं लगी? क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव है?
क्षेत्र में लगभग 125 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से घाट निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण सामग्री तैयार करने के लिए नर्मदा किनारे जेसीबी और भारी मशीनों से खुदाई कर पत्थर निकाले जा रहे थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध उत्खनन कई दिनों से जारी था, लेकिन प्रशासनिक अमला केवल तमाशबीन बना रहा।
एसडीएम स्तर तक मामला पहुंचने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जवाबदारी डालते नजर आए। कहीं रॉयल्टी जमा होने की बात कही गई तो कहीं जानकारी नहीं होने का बहाना बनाया गया। खनिज अधिकारी ने अब नोटिस जारी करने की बात कही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध उत्खनन मौके पर पकड़ा गया तो केवल नोटिस देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी क्यों?
नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवनरेखा है। इसके बावजूद घाटों को खोखला कर प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ा जा रहा है। अवैध खनन से नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, अवैध खनन में शामिल ठेकेदारों और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा नर्मदा घाटों पर चल रहे इस संगठित खेल का स्थायी समाधान निकाला

]]>
5G कपास” का अवैध कारोबार: कृषि विभाग बेखबर, व्यापारी मालामाल — किसान फिर ठगा जा रहा! https://nationtoday24x7.com/uncategorized/5g-%e0%a4%95%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7/ Thu, 28 May 2026 04:03:11 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1878 दुकानों के नाम पते बताने के बाद भी अनजान बनता विभाग

प्रदीप कुमार गांगले


खरगोन जिले सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों तथाकथित “5G कपास” के नाम पर गुजरात और महाराष्ट्र से अवैध रूप से बीजों की बंपर सप्लाई हो रही है। खुलेआम गांव-गांव और खेत-खेत यह कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन कृषि विभाग अब भी केवल कागजी कार्रवाई और खानापूर्ति तक सीमित नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि किसान आज भी कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय सलाह पर नहीं, बल्कि व्यापारियों और दलालों के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं। जबकि विभाग के अधिकारियों को दुकानों गोडाउन के पते भी बता दिए गए हैं कि यह सब समान कहा रखा गया है ।
सूत्रों के अनुसार बिना प्रमाणित और संदिग्ध गुणवत्ता वाले कपास बीज ऊंचे दामों पर किसानों को बेचे जा रहे हैं। बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं कि यह बीज अधिक उत्पादन देगा, कीटों से बचेगा और किसानों को मालामाल कर देगा। लेकिन जब फसल खराब होती है, उत्पादन घटता है या बीमारियां फैलती हैं, तब यही व्यापारी गायब हो जाते हैं और पूरा नुकसान किसान को झेलना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सीमावर्ती राज्यों से इतनी बड़ी मात्रा में अवैध बीज जिले में पहुंच कैसे रहा है? क्या कृषि विभाग, मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारी पूरी तरह आंखें मूंदकर बैठे हैं? गांवों में खुलेआम वाहन भर-भरकर बीज बिक रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल छोटे-मोटे दिखावटी छापे मारकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं।
किसानों का कहना है कि विभाग के अधिकारी केवल प्रेस नोट और बैठकों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अवैध कारोबारियों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों किसानों की मेहनत और करोड़ों रुपये दांव पर लग सकते हैं।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे खेल में कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, तभी बिना रोक-टोक यह गोरखधंधा वर्षों से चलता आ रहा है। प्रशासन यदि सच में गंभीर है तो केवल कागजों में कार्रवाई दिखाने के बजाय सीमाओं पर जांच चौकियां सक्रिय करे, अवैध बीज गोदामों पर बड़े स्तर पर छापेमारी करे और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजे।
अब किसान भी पूछने लगे हैं — आखिर कब तक नकली और अवैध बीजों के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ होता रहेगा? यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और कृषि विभाग की होगी।

]]>
सहकारी बैंक में 41.58 लाख का महाघोटाला, जिम्मेदार कौन?कैशियर फरार, मोबाइल बंद… क्या बिना संरक्षण के संभव है इतनी बड़ी वित्तीय लूट? https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-41-58-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be/ Wed, 27 May 2026 03:38:47 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1875
प्रदीप कुमार गांगले
खरगोन जिले की जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की ठिबगांव शाखा में सामने आया 41 लाख 58 हजार रुपये का गबन अब केवल एक बैंक शाखा की अनियमितता नहीं, बल्कि पूरे सहकारी बैंकिंग तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बनकर खड़ा हो गया है। किसानों, मजदूरों और गरीब खाताधारकों की मेहनत की जमा पूंजी आखिर कितनी सुरक्षित है, यह सवाल अब हर व्यक्ति की जुुबान पर है।
जानकारी के अनुसार 25 मई 2026 को शाखा में नियमित कैश मिलान एवं भौतिक सत्यापन के दौरान बैंक रिकॉर्ड और वास्तविक नगद राशि में भारी अंतर पाया गया। जांच में कुल ₹41,58,095 की नगद कमी सामने आई। मामले ने उस समय और सनसनीखेज रूप ले लिया जब शाखा में पदस्थ कैशियर रितु गोयल अचानक दोपहर बाद गायब हो गईं और उनका मोबाइल फोन भी बंद मिला। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को सीधे-सीधे वित्तीय घोटाले और सुनियोजित गबन की दिशा में खड़ा कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी रकम महीनों तक शाखा से कैसे गायब होती रही और किसी अधिकारी को भनक तक नहीं लगी? बैंकिंग नियमों के अनुसार लाखों रुपये की नगद राशि का प्रतिदिन मिलान, संयुक्त सत्यापन और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण अनिवार्य होता है। फिर भी यदि 41 लाख से अधिक की राशि गायब हो गई तो यह केवल एक कर्मचारी की करतूत नहीं बल्कि शाखा स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक की गंभीर लापरवाही, संदिग्ध कार्यप्रणाली और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
सूत्रों का कहना है कि शाखा में लंबे समय से नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा था। यदि समय रहते जांच नहीं होती तो यह घोटाला और लंबे समय तक दबा रह सकता था। अब यह भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या बैंक प्रबंधन की निगरानी केवल कागजों तक सीमित थी? क्या जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभा रहे थे?
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक की मुख्य कार्यपालक अधिकारी संध्या रोकड़े ने कैशियर रितु गोयल एवं सहायक गणक (वाल टेलर) त्रयम्बक वाणी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शाखा में पंचनामा तैयार कर पुलिस थाना जैतापुर को सूचना दी गई है तथा विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है।
वहीं शाखा प्रबंधक राजेश राठौड़ का बयान भी सवालों के घेरे में आ गया है। उन्होंने पूरे मामले पर केवल इतना कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “जांच के लिए पुलिस में आवेदन दे दिया गया है।” लेकिन अब आम जनता यह पूछ रही है कि क्या केवल आवेदन देकर जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है? आखिर शाखा में प्रतिदिन होने वाले कैश सत्यापन, निगरानी और वित्तीय नियंत्रण की जवाबदेही किसकी थी? यदि शाखा प्रबंधन समय पर सतर्क रहता तो क्या इतनी बड़ी रकम गायब हो पाती?
जनता अब केवल निलंबन की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। क्षेत्र में यह मांग तेज हो रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, शाखा के पिछले कई वर्षों के लेन-देन और ऑडिट रिकॉर्ड खंगाले जाएं तथा उन अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई हो जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया।
लोगों का कहना है कि यदि गरीब किसानों के ऋण की एक किश्त बकाया रह जाए तो बैंक तत्काल नोटिस और कुर्की की कार्रवाई शुरू कर देता है, लेकिन जब बैंक के भीतर लाखों रुपये का गबन हो जाता है तो जिम्मेदार अधिकारी केवल आवेदन और जांच की बात कहकर बचने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। यह दोहरा रवैया अब आम जनता के बीच भारी आक्रोश का कारण बन रहा है।
फिलहाल पुलिस और विभागीय जांच जारी है, लेकिन यह मामला सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में फैली अव्यवस्था, कमजोर निगरानी और जवाबदेही की कमी की पोल खोलता नजर आ रहा है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर उनकी मेहनत की जमा पूंजी की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और इतने बड़े घोटाले का असली मास्टरमाइंड कौन है?

]]>
🌾 किसानों के साथ धोखाधड़ी का सच फिर होगा उजागर“नेशन टुडे” चलाएगा किसान न्याय अभियान, अब होंगे बड़े खुलासे https://nationtoday24x7.com/uncategorized/%f0%9f%8c%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80/ Tue, 26 May 2026 03:33:07 +0000 https://nationtoday24x7.com/?p=1872 प्रदीप कुमार गांगले


देश के किसानों के साथ आर्गेनिक कॉटन के नाम पर हुए कथित छल-कपट और धोखाधड़ी के मामले को अब एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। “नेशन टुडे” ने राष्ट्रवाद सर्वोपरि रखते हुए किसानों के हित में इस पूरे मामले की तह तक जाने का ऐलान किया है।
कभी प्रेस वार्ता कर इस मामले को गंभीर बताते हुए सवाल उठाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अब आखिर चुप क्यों हैं? किसानों के हितों की बात करने वाले बड़े-बड़े नाम आज इस कथित घोटाले पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे? यह सवाल अब किसानों और व्यापार जगत में तेजी से उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि बड़े-बड़े अखबार और मीडिया संस्थान आखिर अब इस मामले की तह तक क्यों नहीं जा रहे? जो मुद्दा कभी सुर्खियों में था, वह अचानक खामोशी में क्यों दब गया? आखिर सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से अब सीधे सवाल क्यों नहीं पूछे जा रहे? किसानों के करोड़ों के नुकसान और कथित फर्जीवाड़े पर जांच और जवाबदेही की मांग आखिर ठंडी क्यों पड़ गई?
“नेशन टुडे” ने कहा है कि इस पूरे मामले में शामिल लोगों तक आखिर कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच पा रही? क्या प्रभावशाली लोगों के कारण आरोपी पहुंच से बाहर हैं? किसानों के साथ हुए कथित आर्थिक नुकसान और विश्वासघात की सच्चाई अब जनता के सामने लाई जाएगी।
अभियान के तहत जिले के हर कॉटन व्यापारी का इंटरव्यू लिया जाएगा और यह प्रकाशित किया जाएगा कि कौन व्यापारी किसानों के हित में खुलकर सामने आता है और कौन जवाब देने से बचता है। इंटरव्यू देने से मना करने वाले व्यापारियों की जानकारी भी फोटो सहित प्रकाशित की जाएगी ताकि किसानों को वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
“नेशन टुडे” ने स्पष्ट कहा है कि किसानों के साथ धोखा अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मुहिम किसानों के सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई है, जिसे अंतिम सत्य सामने आने तक जारी रखा जाएगा।

]]>