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खटारा बसों का कहर: मौत बनकर दौड़ रही अनफिट बसें, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

प्रदीप कुमार गांगले

खरगोन जिले में सड़कों पर दौड़ रही खटारा और अनफिट बसें अब यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। रोजाना हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन जर्जर बसों में सफर करने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक आंखें मूंदे बैठा है। विगत दो वर्षों में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में कई दर्दनाक सड़क हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें अनेक लोगों की मौत हुई, वहीं कई परिवार आज भी अपनों को खोने का दर्द झेल रहे हैं।
स्थिति यह है कि कई बसों की बॉडी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, सीटें टूटी हुई हैं, ब्रेक और लाइट व्यवस्था तक ठीक नहीं रहती, फिर भी ये बसें खुलेआम सड़कों पर दौड़ रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि फिटनेस के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जाती है और परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले छात्र, मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशान हैं। कई बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरकर संचालन किया जा रहा है। हादसे होने के बाद कुछ दिन कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाती है, लेकिन फिर वही खटारा वाहन सड़कों पर उतर आते हैं।

क्या कहते हैं आम नागरिक


स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिले में चल रही सभी निजी बसों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अनफिट वाहनों का परमिट तत्काल निरस्त किया जाए तथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में और बड़े हादसे हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और परिवहन विभाग की होगी।

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