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जैविक खेती के नाम पर धोखा धडी कई बार कर चुके हैं शिकायत किसानों ने एडिशनल एसपी को सौंपी शिकायत, हाईकोर्ट आदेश के बावजूद FIR नहीं

किसानों ने लगाए गंभीर आरोप न्यायालय की अवमानना बताते हुए पुलिस अधीक्षक से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

–प्रदीप कुमार गांगले – – –

खरगोन। जिले के जैविक खेती के नाम से धोखा धडी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में हे इस बार झिरन्या क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग) के नाम पर हुए कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ एडिशनल एसपी को आवेदन सौंपा है। किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी सहमति के बिना उनके आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज़ और हस्ताक्षर/अंगूठे का उपयोग कर फर्जी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट, बिल और भुगतान रसीदें तैयार की गईं। आवेदन में कहा गया है कि इस पूरे घोटाले में किसानों को झूठे तौर पर जैविक उत्पादक दिखाया गया, जबकि वे वास्तव में रासायनिक खाद और कीटनाशक का उपयोग करते थे। इन फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर करोड़ों रुपये के अवैध व्यापार का खेल चलाया गया है।

इसे समझे

किसानों के दस्तावेज़ों से बने फर्जी “ICS समूह” किसानों के अनुसार, उनकी जानकारी के बिना निम्नलिखित फर्जी “ICS (Internal Control System)” समूह बनाए गए —
ग्रीन वर्ल्ड, रुद्र इको, शिव इको और स्टार लाइफ।
प्रत्येक समूह में 450 से 500 किसानों के नाम जोड़े गए हैं, जबकि अधिकांश किसानों को इसकी भनक तक नहीं है।

कैसे हुआ ये किसानों के साथ खेल

इन सभी समूहों को Bureau Veritas, Mumbai नामक प्रमाणन संस्था द्वारा बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के जैविक प्रमाण पत्र जारी किए गए। किसानों का कहना है कि यह केवल कागज़ी प्रमाणन है, जिसमें जमीनी स्तर पर कोई जांच नहीं हुई।


कौन हे ये आरोपी उनके नाम

आवेदन में निम्न लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं —

  1. अर्पित बनकर, संचालक — माँ गंगा कॉटन, निवासी गंगानगर एवं ग्रीन गोल्ड कॉलोनी, खरगोन।
  2. राज रूपेश पंडित, पार्टनर — माँ गंगा कॉटन, निवासी मंडलेश्वर।
  3. कल्याणी महाजन, पार्टनर — माँ गंगा कॉटन, निवासी राजपुर (जिला बड़वानी)।
  4. अरुण पाटीदार, ICS मैनेजर, जो किसानों के दस्तावेज़ एकत्रित करने और समूह बनाने में शामिल बताया गया है।
  5. Bureau Veritas, Mumbai के ऑडिटर और प्रमाणन अधिकारी, जिन्होंने बिना स्थल निरीक्षण के प्रमाण पत्र जारी किए।

किसानों ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने खरगोन के “91 राधा वल्लभ मार्केट” पते को कागज़ी दफ्तर के रूप में दर्शाया है, जबकि वहां कोई वास्तविक कार्यालय मौजूद नहीं है।


हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं

इस मामले पर माननीय हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने 31 जुलाई 2025 को Writ Petition No. 30220/2025 में आदेश जारी किया था कि जांच पूरी कर 60 दिनों के भीतर कार्रवाई की जाए।
लेकिन किसानों का कहना है कि 6 अक्टूबर 2025 तक भी किसी आरोपी पर FIR दर्ज नहीं हुई है। किसानों ने इसे न्यायालय की अवमानना बताते हुए पुलिस अधीक्षक से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।


इन गांवों में हुआ फर्जीवाड़ा

आवेदन के अनुसार, फर्जी जैविक खेती का यह जाल घोड़ी बुजुर्ग, सपाटिया, गुलझेरा, धूपा, पीढ़ी जमाली, रॉयल बड़ा, गाड़गयाम, रुदा बूंद, मंडावा और तितरनिया सहित आसपास के कई ग्राम पंचायतों तक फैला हुआ है।
यह क्षेत्र मुख्यतः आदिवासी बहुल है, जहाँ किसानों की अशिक्षा और सरकारी तंत्र की कमी का फायदा उठाकर यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय है।


किसानों की मांग

किसानों ने मांग की है कि —

अर्पित बनकर, राज रूपेश पंडित, कल्याणी महाजन, अरुण पाटीदार तथा
Bureau Veritas के ऑडिटरों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जिन किसानों के नाम से फर्जीवाड़ा हुआ है, उन्हें सूचित कर आर्थिक व कानूनी मुआवजा दिलाया जाए।

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