खरगोन। नगर पालिका परिषद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लाखों रुपये के जिम उपकरणों की खरीदी को लेकर उठे विवाद ने परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस खरीदी को लेकर पूरे शहर में चर्चा है, उसी मामले में अध्यक्ष महोदया द्वारा लगातार अलग-अलग जानकारियां दिए जाने से संदेह और गहरा गया है।शहर में चर्चा है कि पूरे प्रकरण में कमीशनखोरी का खेल हुआ है और अब संबंधित लोगों को बचाने की कवायद चल रही है। विशेष रूप से इंदौर के दीपक नामक व्यक्ति की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उसका नाम और भूमिका सार्वजनिक करने से परहेज क्यों किया जा रहा है?सूत्रों के अनुसार जिम का सामान फिलहाल सुरक्षित रख दिया गया है और पूरे मामले को नए टेंडर की दिशा में ले जाने की तैयारी है। यदि ऐसा है तो सवाल यह है कि बिना पूरी तैयारी और पारदर्शिता के लाखों रुपये की प्रक्रिया आखिर शुरू ही क्यों की गई?मूर्ति कांड के बाद अब जिम प्रकरण में भी अध्यक्ष महोदया के परिवार की भूमिका को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्ष के साथ-साथ परिषद के भीतर भी असंतोष की आवाजें सुनाई देने लगी हैं। जो पार्षद कल तक खुलकर समर्थन में खड़े थे, उनके बदलते सुर अब राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गए हैं।नगरवासियों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो फिर तथ्यों को सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट क्यों है? और यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?जनता के सवालजिम खरीदी का वास्तविक लाभ किसे मिलने वाला था?इंदौर के दीपक नामक व्यक्ति की भूमिका क्या है?जिम उपकरणों को सुरक्षित रखकर दोबारा टेंडर की तैयारी क्यों?क्या परिषद में निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधि ले रहे हैं या पर्दे के पीछे कोई और खेल संचालित कर रहा है?नगर में अब एक ही चर्चा है— विकास के नाम पर खर्च हुए लाखों रुपये का हिसाब कौन देगा और सच सामने कब आएगा?
मुझे कोई जानकारी नहीं लोग झूठी कहानियां बोल रहे मुझे बदनाम करने के लिए ।
छाया जोशी नगर पालिका परिषद खरगोन



