प्रदीप कुमार गांगले
खरगोन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत जिले के 980 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल के चौथे दिन एक अनोखे और भावनात्मक विरोध प्रदर्शन के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपने रक्त से लिखे पोस्टकार्ड भेजकर वर्षों की उपेक्षा और पीड़ा को व्यक्त किया।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला अध्यक्ष ने बताया कि यह किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि मजबूरी, संघर्ष और दर्द की वह आवाज़ है जिसे सरकार तक पहुंचाने के लिए कर्मचारियों ने अपने खून का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर आज तक संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात जनता की सेवा की, लेकिन इसके बावजूद आज भी वे असुरक्षित भविष्य, अल्प वेतन, ग्रेड-पे विसंगति तथा नियमितीकरण जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर कार्य करने वाले संविदा कर्मियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। मजबूर होकर अब उन्होंने अपने रक्त से मुख्यमंत्री के नाम संदेश लिखकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।
संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार से टकराव नहीं, बल्कि समस्याओं का सम्मानजनक समाधान प्राप्त करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनके समर्पण, सेवा और परिवारों की चिंता को समझते हुए मांगों पर सकारात्मक एवं संवेदनशील निर्णय लेगी।
हड़ताली कर्मचारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए रक्त लिखित पोस्टकार्ड केवल कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि उन हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की उम्मीद, पीड़ा और संघर्ष का प्रतीक हैं जिन्होंने वर्षों तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दिया है।
“खून से लिखी चिट्ठी, फिर भी नहीं पिघला सिस्टम”
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का सवाल – आखिर कब सुनेगी सरकार उन हाथों की पुकार, जिन्होंने संकट के समय प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाला था?



