HomeUncategorizedस्वास्थ्य व्यवस्था पर लगा ब्रेक! 980 संविदा कर्मियों की हड़ताल से खरगोन...

स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगा ब्रेक! 980 संविदा कर्मियों की हड़ताल से खरगोन जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं


जिला अस्पताल से लेकर गांवों के स्वास्थ्य केंद्र तक कामकाज ठप, मरीज और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

प्रदीप कुमार गांगले
खरगोन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत जिले के लगभग 980 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई है। प्रदेशभर के 32 हजार संविदा कर्मचारियों द्वारा एक साथ काम बंद करने का असर अब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में साफ दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्रों तक अनेक जरूरी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।
संविदा स्वास्थ्य संगठन की जिलाध्यक्ष ममता हिरवे ने आरोप लगाया कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर काम कर रहे कर्मचारियों के साथ लगातार वादाखिलाफी की जा रही है। 2018 की वेतन नीति हो, 2023 की संविदा नीति हो या फिर मुख्यमंत्री द्वारा जनवरी 2026 में की गई घोषणाएं—आज तक अधिकांश फैसले कागजों से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी, प्रसूताओं पर संकट
जिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में 10 में से 8 संविदा नर्सिंग ऑफिसर हड़ताल पर हैं। ऐसे में प्रसूता महिलाओं की देखरेख का जिम्मा गिने-चुने कर्मचारियों पर आ गया है। कई वार्डों में कर्मचारियों से अतिरिक्त ड्यूटी कराई जा रही है, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है।
टीबी, टीकाकरण, लेबर रूम और जांच सेवाएं प्रभावित
हड़ताल के कारण मेडिकल वार्ड, टीबी यूनिट, एसएनसीयू, एनसीडी क्लिनिक, परिवार कल्याण केंद्र, औषधि वितरण केंद्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा, सीएम हेल्पलाइन, एमएलसी सेवाएं, एनआरसी, एएनसी एवं पीएनसी वार्डों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
गांवों तक पहुंचा असर, ऑनलाइन सिस्टम भी ठप
ब्लॉक स्तर पर अनमोल पोर्टल, यू-विन पोर्टल, टीकाकरण सत्र निर्माण, सिकल सेल जांच, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, लाभार्थी भुगतान, जन्म-मृत्यु पंजीयन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग का कार्य लगभग ठप पड़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के नियमित टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
सरकार की घोषणाएं बनीं कागजी वादे?
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि 15 से 20 वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न तो नियमितीकरण का लाभ मिला और न ही घोषित सुविधाएं। कर्मचारियों का आरोप है कि हर आंदोलन के बाद आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन क्रियान्वयन नहीं होता।
चेतावनी: मांगें पूरी नहीं हुईं तो और गहराएगा संकट
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो जिले की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर लाखों मरीजों, गर्भवती महिलाओं और ग्रामीण जनता पर पड़ेगा।
बड़ा सवाल
क्या स्वास्थ्य व्यवस्था का आधार बने संविदा कर्मचारियों की अनदेखी सरकार को भारी पड़ेगी?

RELATED ARTICLES

Most Popular