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दिखावे की कार्रवाई या असली मुहिम? आबकारी विभाग की दोहरी नीति पर सवाल

खरगोन से रोहित दांगी रिपोर्ट


खरगोन । आबकारी विभाग द्वारा अवैध मदिरा के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी गई है, जिसमें वृत्त प्रभारी ओमप्रकाश मालवीय, आबकारी उपनिरीक्षक द्वारा म.प्र. आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत 10 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इस कार्रवाई में 3 आरोपियों को गिरफ्तार, 180 लीटर हाथ भट्टी मदिरा, तथा 9500 किलोग्राम महुआ लहान जब्त कर नष्ट किया गया है।

लेकिन अब सवाल उठता है – क्या यह कार्रवाई केवल दिखावा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ तो त्योहारों या पारंपरिक अवसरों पर अपने उपभोग के लिए घरों में सीमित मात्रा में तैयार की जाने वाली महुआ शराब पर कार्रवाई कर गरीब ग्रामीणों को 34(1) के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शराब ठेकेदार खुलेआम सरकारी दर (एमआरपी) से अधिक कीमत पर शराब बेच रहे हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में शराब दुकानों के पास अवैध ‘हांहता’ (गुप्त अड्डे) खुलेआम संचालित हो रहे हैं और गांव-ढाबों से देसी-विदेशी शराब की अवैध बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। इन पर न कोई दबिश, न कोई कार्रवाई।

प्रश्न यह भी उठता है:
क्या आबकारी विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई महज आँकड़ों की खानापूर्ति और मीडिया में छवि सुधारने की कवायद है?
क्यों ठेकेदारों और बड़े अवैध विक्रेताओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है?
क्या गरीब ग्रामीणों पर कानून का भय और अमीर ठेकेदारों को छूट – यही असली तस्वीर है?

स्थानीय लोगों की माँग है कि:

असली अवैध बिक्री पर रोक लगे

ठेकेदारों द्वारा एमआरपी से अधिक दाम पर बिक्री बंद करवाई जाए

ढाबों व हांहतों पर छापा मारा जाए

और पारंपरिक सीमित उपयोग को अपराध न बनाया जाए
अब देखना ये होगा कि क्या प्रशासन इन सवालों का जवाब देता है…
या कार्रवाई सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह जाती है।

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