प्रदीप कुमार गांगले
महेश्वर। आस्था, श्रद्धा और परंपरा का संगम बनने जा रही पवित्र नर्मदा पंचकोषी पदयात्रा का शुभारंभ 29 मार्च 2026, रविवार से महेश्वर (माहिष्मती) से होगा। शैव प्रवासी संप्रदाय के तत्वावधान में गुरुदेव डॉ. रविन्द्र भारती चौरे द्वारा स्थापित परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह यात्रा केन्द्रीय समिति गुरु स्थान पुनासा और स्थानीय समिति महेश्वर द्वारा आयोजित की जा रही है।
यह पंचकोषी पदयात्रा नर्मदा तट की आध्यात्मिक ऊर्जा, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत उदाहरण है। इस यात्रा की शुरुआत वर्ष 1985 में ब्रह्मलीन डॉ. रविन्द्र चौरे ‘भारती’ ने मात्र 10 श्रद्धालुओं के साथ की थी, जो आज हजारों भक्तों की आस्था का विशाल स्वरूप बन चुकी है।
इतिहास और आध्यात्मिक महत्व
नर्मदा की परिक्रमा प्राचीन काल से होती रही है, लेकिन लघु पंचकोषी पदयात्रा की शुरुआत का श्रेय डॉ. चौरे ‘भारती’ को जाता है। उन्होंने 1975 में ॐकारेश्वर से प्रथम पंचकोषी यात्रा प्रारंभ की थी। बाद में महेश्वर को द्वितीय प्रमुख केंद्र बनाकर इस यात्रा को विस्तार दिया गया।
यह यात्रा अपने गुरु श्री कृष्ण स्वरूप महाराज (जयपुर) एवं पूज्य डोंगरे महाराज को समर्पित है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
29 मार्च (रविवार): अहिल्या घाट पर नर्मदा पूजन, ध्वज पूजन, नर्मदाष्टक व आरती के बाद यात्रा प्रारंभ होगी। राजराजेश्वर शिवालय दर्शन के बाद यात्रा रामकुंड, बाराद्वारी, ढपला होते हुए ग्राम चोली पहुंचेगी (प्रथम विश्राम)।
30 मार्च (सोमवार): चोली से प्रस्थान कर पीएचई मार्ग होते हुए ग्राम जलूद इंटकवेल (द्वितीय विश्राम)।
31 मार्च (मंगलवार): नर्मदा पुल पार कर वेदा-रेवा संगम, स्वर्णदीप तीर्थ, वेदेश्वर तीर्थ, माकड़खेड़ा होते हुए कसरावद कृषि उपज मंडी (तृतीय विश्राम)।
01 अप्रैल (बुधवार): कसरावद से भीलगांव, सत्यधाम आश्रम, डोंगरगांव, ढालखेड़ा होते हुए नाव द्वारा नर्मदा पार कर सहस्त्रधारा, जलकोटी (चतुर्थ विश्राम)।
02 अप्रैल (गुरुवार): जलकोटी से श्रीदत्त मंदिर दर्शन के बाद महेश्वर वापसी, देवालय दर्शन, पूजन व प्रसादी के साथ यात्रा का समापन।
यात्रा की विशेषताएं
प्रतिदिन सुबह-शाम नर्मदा पूजन, आरती, भजन-कीर्तन
मार्ग में ग्रामवासियों द्वारा स्वागत, चाय-नाश्ता व भोजन प्रसादी
अनुशासन, स्वच्छता और श्रद्धा पर विशेष जोर
नर्मदा पार करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान
आयोजकों की अपील
पंचकोषी संयोजकों पी. के. गुप्ता, सुरेश सराफ, रामेश्वर सराफ सहित समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें, ओंकार ध्वज का सम्मान करें और पर्यावरण स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
यह पंचकोषी पदयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि नर्मदा तट की संस्कृति, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को भी सशक्त करती है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के “नर्मदे हर” जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठेगा।



