खरगोन/निमाड़ अंचल में आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति के महापर्व गणगौर की रौनक इन दिनों चरम पर है। इस पावन अवसर पर नन्ही-मुनि बच्चियों ने दूल्हा-दुल्हन का रूप धारण कर पारंपरिक ‘झालरियो’ गीतों के साथ गणगौर माता की पूजा-अर्चना की शुरुआत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
सुबह से ही गांवों और शहरों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी बच्चियों ने सिर पर कलश धारण कर समूह में ‘झालरियो’ गीत गाए, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास की गूंज सुनाई दी। यह मनमोहक दृश्य निमाड़ की समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत चित्र प्रस्तुत करता नजर आया।
निमाड़ क्षेत्र में मान्यता है कि गणगौर माता की विधिवत पूजा करने से सुख-समृद्धि के साथ अच्छी फसलों की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि किसान वर्ग भी इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाता है और पूरे श्रद्धाभाव से माता की आराधना करता है।
गणगौर पर्व के दौरान महिलाएं और युवतियां कई दिनों तक व्रत रखकर माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करती हैं। वहीं नन्हीं बच्चियों की सक्रिय भागीदारी इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रही है, जो सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है।
पूरे निमाड़ में इन दिनों भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। हर गली-मोहल्ले में गणगौर माता के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना का क्रम जारी है।
इस आयोजन में गुनु, ओशी, आरोही, मान्यता, विभा सहित अन्य बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्व की गरिमा को और बढ़ाया।
नन्ही मुनि बच्चियों ने सजाया गणगौर पर्व, दूल्हा-दुल्हन बन गूंजे ‘झालरियो’ के सुर
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