प्रदीप कुमार गांगले
खरगोन। शहर के गुप्ता परिवार में जन्मी नन्ही किलकारी ने न केवल घर-आंगन को उल्लास से भर दिया, बल्कि पूरे समाज को एक सशक्त और सकारात्मक संदेश भी दिया है। जहां प्रायः खुशियों के अवसर पर मिठाइयों का वितरण किया जाता है, वहीं इस परिवार ने अपनी बेटी के आगमन को प्रकृति के संवर्धन से जोड़ते हुए एक अद्भुत और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
‘रामफल’ पौधे से किया सम्मान, दिया संरक्षण का संदेश
बेटी के जन्म के इस पावन अवसर पर गुप्ता परिवार ने अस्पताल के चिकित्सक को ‘रामफल’ का पौधा भेंट कर सम्मानित किया। यह पौधा न केवल फलदार है, बल्कि आज के समय में दुर्लभ होती जा रही प्रजातियों में शामिल है। इस अनूठे उपहार के माध्यम से परिवार ने यह संदेश दिया कि जैसे बेटियां सृष्टि की अनमोल धरोहर हैं, वैसे ही प्रकृति की जैव विविधता का संरक्षण भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
बेटी के संग बढ़ेगी हरियाली, 51 पौधों का संकल्प
नन्ही बिटिया के पिता ने इस खुशी को एक सामाजिक अभियान का रूप देते हुए 51 पौधों के रोपण का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि जैसे-जैसे उनकी बेटी जीवन की नई ऊंचाइयों को छुएगी, वैसे-वैसे ये पौधे भी वृक्ष बनकर पर्यावरण को जीवनदायी छाया, शुद्ध वायु और हरियाली प्रदान करेंगे। यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक हरित और स्वस्थ विरासत का निर्माण करेगी।
चिकित्सकों ने बताया अनुकरणीय कदम
अस्पताल के डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा—
“यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाला सशक्त संदेश है। जीवन देने वाले पौधों को उपहार स्वरूप देना एक संवेदनशील और प्रगतिशील सोच का प्रतीक है। ऐसी पहलें निश्चित ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तय करती हैं।”
यह पहल ‘बेटी बचाओ, पर्यावरण बचाओ’ के संदेश को नई ऊर्जा और गहराई प्रदान करती है। गुप्ता परिवार का यह कदम न केवल एक उत्सव है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी है—जहां खुशियां केवल मनाई नहीं जातीं, बल्कि उन्हें प्रकृति के साथ साझा कर आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोया जाता है।



