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जन्मदिन पर उत्सव नहीं, सेवा का संकल्प: खनिज अधिकारी सावन चौहान ने 76 यूनिट रक्त जुटाकर दी जीवन की सौगात

प्रदीप कुमार गांगले


खरगोन। जब अधिकांश लोग अपना जन्मदिन केक और शुभकामनाओं के बीच मनाते हैं, तब जिले के खनिज अधिकारी सावन चौहान इसे समाजसेवा के अवसर में बदल देते हैं। 20 फरवरी को उन्होंने परसाई कॉलोनी स्थित रक्षा हॉस्पिटल में भव्य रक्तदान शिविर आयोजित कर स्वयं रक्तदान करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, स्टोन क्रशर संगठन के पदाधिकारी एवं उनके स्नेहीजनों सहित कुल 76 लोगों ने रक्तदान किया। ब्लड बैंक टीम के अनुसार एकत्रित रक्त जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और अन्य रोगियों को नया जीवन मिलेगा।
प्रशासनिक सख्ती, सामाजिक संवेदनशीलता
पिछले पाँच वर्षों से खरगोन में पदस्थ चौहान ने खनिज राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये शासन खाते में जमा करवाए हैं। अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई कर उन्होंने शासन की योजनाओं को मजबूती दी है। उनकी कार्यशैली प्रशासनिक दृढ़ता और पारदर्शिता के लिए जानी जाती है।
लेकिन उनकी पहचान केवल एक सख्त अधिकारी तक सीमित नहीं है। वे सामाजिक उत्तरदायित्व को समान महत्व देते हैं। बड़वाह के मूकबधिर बच्चों के साथ स्नेह भोज, झिरन्या और भीकनगांव के टीबी मरीजों को 50-50 राशन पैकेट वितरण जैसे कार्य उनकी मानवीय सोच को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञों ने सराहा प्रयास
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.एस. चौहान ने कहा कि टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराना उनके स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं डॉ. हितेश मुजाल्दा ने बताया कि सामाजिक संगठनों के लिए अस्पताल परिसर नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाना समाजहित की पहल है। सामाजिक कार्यकर्ता महेश भूरिया ने कहा कि शासकीय सेवा में रहते हुए निरंतर सामाजिक कार्य करना वास्तव में प्रेरणादायक है।
“रक्तदान सबसे बड़ा दान”
सावन चौहान ने संदेश दिया कि रक्त ऐसा अमूल्य तत्व है, जिसे किसी प्रयोगशाला में तैयार नहीं किया जा सकता। जिले में सिकलसेल, एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उन्होंने हर वर्ष रक्तदान शिविर आयोजित करने का संकल्प लिया है।
उनकी यह पहल बताती है कि प्रशासनिक पद केवल अधिकार नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील जिम्मेदारी भी है। जन्मदिन को सेवा-दिवस के रूप में मनाकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा उत्सव वही है, जो किसी के जीवन में आशा का दीप जला दे।
— प्रदीप कुमार गांगले

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