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टंट्या मामा की मूर्ति में घोटाले पर नगर पालिका की स्वीकारोक्ति दोषियों पर गिरी गाज, ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, इंजीनियरों पर जांच

प्रदीप कुमार गांगले


खरगोन | नगर पालिका परिषद खरगोन आखिरकार “क्रांतिसूर्य” टंट्या मामा भील की धातु की मूर्ति से जुड़े भ्रष्टाचार और लापरवाही को स्वीकारने पर मजबूर हुई। प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल (PIC) की 13 जनवरी 2026 को आयोजित बैठक में पारित संकल्प क्रमांक 283 ने न सिर्फ नई धातु की मूर्ति स्थापित करने का फैसला लिया, बल्कि पूरे मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता भी खोल दिया।
पी.आई.सी. ने स्पष्ट किया कि टंट्या मामा जैसी महान क्रांतिकारी विभूति के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। इसी के तहत निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही ऑनलाइन निविदा जारी कर नई धातु की मूर्ति स्थापित की जाएगी और कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
घोटालेबाज ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई
बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि पूर्व में मूर्ति निर्माण में आदेशित सामग्री के स्थान पर घटिया व भिन्न सामग्री की आपूर्ति की गई। इस गंभीर अनियमितता पर नगर पालिका ने संविदाकार पिनॉक ट्रेडिंग कम्पनी (प्रो. ऐश्वर्य भट्ट), खरगोन को ब्लैकलिस्ट करने का संकल्प पारित किया। यह फैसला साफ संकेत है कि अब नगर पालिका कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने को मजबूर है।
इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल, विभागीय जांच के आदेश
मामले में नगर पालिका के उपयंत्री एवं प्रभारी सहायक यंत्री की भूमिका को भी संदिग्ध मानते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित करने का निर्णय लिया गया है। सवाल यह है कि जब घटिया सामग्री लगाई जा रही थी, तब तकनीकी अधिकारियों की आंखें बंद क्यों थीं?
जनजातीय समाज के गौरव से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
“क्रांतिसूर्य” टंट्या मामा भील केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान का प्रतीक हैं। उनकी मूर्ति में की गई लापरवाही और भ्रष्टाचार ने पूरे समाज की भावनाओं को आहत किया है। अब पी.आई.सी. का दावा है कि नई धातु की मूर्ति ससम्मान, गरिमा और गुणवत्ता के साथ स्थापित की जाएगी तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
जनता का सवाल अब भी कायम
हालांकि सवाल अब भी कायम है—
अगर मामला सामने न आता, अगर सोशल मीडिया और जनआक्रोश न होता, तो क्या यह कार्रवाई होती?
नगर पालिका की यह सख्ती वास्तविक सुधार है या फिर दबाव में लिया गया फैसला— इसका जवाब आने वाला समय देगा।
फिलहाल इतना तय है कि टंट्या मामा के नाम पर हुआ यह अपमान अब प्रशासन के गले की फांस बन चुका है, और जनता की निगाहें हर अगले कदम पर टिकी हैं।

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