HomeUncategorizedदिखावे की सफाई या जिम्मेदारी से भागना? गवर्नर साहब के जाते ही...

दिखावे की सफाई या जिम्मेदारी से भागना? गवर्नर साहब के जाते ही कुछ दिनों बाद सड़क पर लौट आई गंदगी”

“प्रदीप कुमार गांगले
खरगोन। शहर में साफ-सफाई और व्यवस्था को लेकर अक्सर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। हाल ही में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने इन दावों की पोल खोलकर रख दी। गवर्नर साहब के आगमन के दौरान जिस ऊबड़ खाबड़ को सड़क को चकाचक और व्यवस्थित किया गया था, उनके जाते ही वही सड़क फिर से गंदगी का अड्डा बन गई। यह नजारा न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि निजी संस्थानों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
शहर की नई सड़क पर स्थित रक्षा हॉस्पिटल, जो सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी के आधुनिक इलाज के लिए जाना जाता है, आम नागरिकों की चर्चा का विषय बना हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि जिस अस्पताल का नाम चिकित्सा क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता है, वहां स्वच्छता और व्यवस्था का भी उतना ही ध्यान रखा जाता होगा। लेकिन जो दृश्य सामने आया, उसने इन उम्मीदों को गहरी ठेस पहुंचाई।
अस्पताल के ठीक सामने सड़क पर मरीजों के उपचार में उपयोग होने के बाद अपशिष्ट कचरा खुलेआम पड़ा हुआ देखा गया। यह न केवल अस्वच्छता का परिचायक है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। मेडिकल वेस्ट का इस तरह खुले में पड़ा होना नियमों की खुलेआम अनदेखी है और यह सवाल खड़ा करता है कि क्या ऐसे संस्थान केवल इलाज तक सीमित हैं या उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी एहसास है?
यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सफाई व्यवस्था केवल विशेष अवसरों और बड़े अधिकारियों के दौरे तक ही सीमित रह गई है। जैसे ही निगरानी खत्म होती है, लापरवाही फिर से अपनी जगह बना लेती है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि निजी संस्थानों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाती है।
शहर के नागरिक अब यह सोचने को मजबूर हैं कि क्या यह वही व्यवस्था है, जिस पर उन्हें गर्व होना चाहिए? क्या स्वच्छता केवल दिखावे तक ही सीमित रह गई है? और क्या आम जनता का स्वास्थ्य और सुरक्षा इतनी सस्ती हो गई है कि उसे इस तरह नजरअंदाज किया जा सके?
जरूरत है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। क्योंकि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी है—और इससे समझौता किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular